BRABU B.Sc Botany Semester-3 (MJC-3)
Unit-1 : Fungi - General Characteristics
Fungi ऐसे यूकैरियोटिक (Eukaryotic), क्लोरोफिल रहित जीव होते हैं जो भोजन के लिए अन्य जीवों या मृत कार्बनिक पदार्थों पर निर्भर रहते हैं। ये अपने शरीर से एंजाइम स्रावित करके भोजन का अवशोषण करते हैं।
1. Fungi का परिचय (Introduction of Fungi)
Fungi जीव-जगत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समूह है। यह पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे विविध जीवों में से एक है। सामान्य भाषा में इन्हें कवक कहा जाता है।
प्रकृति में Fungi हर जगह पाए जाते हैं। ये मिट्टी, पानी, हवा, सड़े-गले पदार्थ, पौधों, जानवरों और यहाँ तक कि मनुष्य के शरीर में भी पाए जा सकते हैं।
हम अपने दैनिक जीवन में कई प्रकार के कवकों को देखते हैं, जैसे-
- Mushroom (खाने वाला कुकुरमुत्ता)
- Bread Mould (रोटी पर उगने वाली फफूँदी)
- Yeast (खमीर)
- Penicillium
- Aspergillus
कवकों का महत्व केवल जैविक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि कृषि, चिकित्सा, खाद्य उद्योग तथा पर्यावरण संरक्षण में भी अत्यधिक है।
2. Fungi शब्द की उत्पत्ति (Origin of the Word Fungi)
Fungi शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द "Fungus" से हुई है।
लैटिन शब्द "Fungus" का अर्थ होता है "Mushroom" या "Toadstool" अर्थात् कुकुरमुत्ता।
कवकों के अध्ययन को Mycology कहा जाता है।
Mycology = Fungi का अध्ययन
Mycologist = Fungi का अध्ययन करने वाला वैज्ञानिक
Heinrich Anton de Bary को आधुनिक कवक विज्ञान का जनक (Father of Modern Mycology) कहा जाता है।
3. Fungi क्या होते हैं? (What are Fungi?)
Fungi ऐसे जीव हैं जो स्वयं भोजन नहीं बना सकते। इसलिए इन्हें Heterotrophic Organisms कहा जाता है।
ये अपने आसपास उपस्थित कार्बनिक पदार्थों से भोजन प्राप्त करते हैं। भोजन प्राप्त करने की प्रक्रिया को Absorptive Nutrition कहते हैं।
Fungi मुख्यतः तीन प्रकार से भोजन प्राप्त करते हैं:
| पोषण का प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| Saprophytic | मृत कार्बनिक पदार्थों से भोजन प्राप्त करते हैं | Rhizopus, Mucor |
| Parasitic | जीवित पौधों या जन्तुओं से भोजन प्राप्त करते हैं | Puccinia |
| Symbiotic | अन्य जीवों के साथ सहजीवी सम्बन्ध बनाते हैं | Lichen, Mycorrhiza |
4. Fungi की प्रमुख विशेषताएँ (General Characteristics of Fungi)
कवकों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- Fungi यूकैरियोटिक जीव होते हैं।
- इनमें क्लोरोफिल नहीं पाया जाता।
- इनका पोषण विषमपोषी (Heterotrophic) होता है।
- इनकी कोशिका भित्ति मुख्यतः Chitin से बनी होती है।
- इनका शरीर धागेनुमा Hyphae से बना होता है।
- Hyphae के समूह को Mycelium कहा जाता है।
- ये बीजाणुओं (Spores) द्वारा जनन करते हैं।
- अधिकांश Fungi बहुकोशिकीय होते हैं।
- Yeast एक एककोशिकीय कवक है।
- Fungi ऊर्जा संचय Glycogen के रूप में करते हैं।
5. Fungi को पादपों से अलग क्यों माना जाता है?
प्रारम्भ में Fungi को पादप जगत (Plant Kingdom) का सदस्य माना जाता था, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि Fungi और पादपों में अनेक मूलभूत अंतर हैं।
| आधार | पादप (Plants) | Fungi |
|---|---|---|
| क्लोरोफिल | उपस्थित | अनुपस्थित |
| पोषण | स्वपोषी | विषमपोषी |
| कोशिका भित्ति | Cellulose | Chitin |
| भोजन संचय | Starch | Glycogen |
| शरीर संरचना | जड़, तना, पत्ती | Hyphae और Mycelium |
इन्हीं कारणों से वैज्ञानिक R.H. Whittaker ने 1969 में Fungi को एक अलग Kingdom "Kingdom Fungi" में रखा।
6. Fungi की कोशिकीय प्रकृति (Cellular Nature of Fungi)
Fungi की कोशिकाएँ पूर्ण विकसित Eukaryotic Cells होती हैं।
इनकी कोशिकाओं में निम्नलिखित संरचनाएँ पाई जाती हैं:
- True Nucleus
- Nuclear Membrane
- Mitochondria
- Endoplasmic Reticulum
- Golgi Bodies
- Ribosomes
- Large Vacuoles
Fungi की कोशिकाओं में Chloroplast अनुपस्थित होता है, इसलिए ये प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकते।
7. Fungi का शरीर कैसा होता है? (Body Structure of Fungi)
अधिकांश कवकों का शरीर बहुत पतले, धागे जैसे तंतुओं से बना होता है जिन्हें Hyphae कहते हैं।
अनेक Hyphae मिलकर एक जाल जैसी संरचना बनाते हैं जिसे Mycelium कहा जाता है।
Mycelium ही कवक का मुख्य वानस्पतिक शरीर होता है।
Hyphae के प्रकार
| प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| Septate Hyphae | इनमें विभाजक दीवारें (Septa) होती हैं। |
| Coenocytic Hyphae | इनमें Septa अनुपस्थित होते हैं। |
उदाहरण:
- Aspergillus → Septate Hyphae
- Rhizopus → Coenocytic Hyphae
8. Fungi में क्लोरोफिल का अभाव (Absence of Chlorophyll in Fungi)
Fungi की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इनमें Chlorophyll नहीं पाया जाता।
क्लोरोफिल वह हरा वर्णक है जो पौधों को प्रकाश संश्लेषण करने में सहायता करता है।
चूँकि कवकों में क्लोरोफिल नहीं होता, इसलिए ये अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते।
इसी कारण Fungi को भोजन के लिए अन्य जीवों या मृत कार्बनिक पदार्थों पर निर्भर रहना पड़ता है।
रोटी को कुछ दिनों तक नम स्थान पर रखने पर उस पर काली फफूँदी (Rhizopus) उग जाती है। यह रोटी से पोषण प्राप्त करती है क्योंकि यह स्वयं भोजन नहीं बना सकती।
9. Fungi की वृद्धि और विकास (Growth and Development in Fungi)
Fungi की वृद्धि मुख्य रूप से उनकी Hyphae के बढ़ने से होती है। Hyphae की नोक (Tip) पर लगातार नई कोशिकाएँ बनती रहती हैं, जिससे कवक का शरीर तेजी से फैलता जाता है। इस प्रकार की वृद्धि को Apical Growth कहा जाता है।
अनुकूल परिस्थितियों जैसे उचित तापमान, पर्याप्त नमी तथा पर्याप्त पोषण की उपस्थिति में कवकों की वृद्धि बहुत तेज होती है।
Apical Growth वह प्रक्रिया है जिसमें Hyphae की नोक से नई कोशिकाएँ बनती हैं और कवक का शरीर लंबाई में बढ़ता है।
Fungi की वृद्धि को प्रभावित करने वाले कारक
| कारक | प्रभाव |
|---|---|
| Temperature | अधिकांश कवक 20°C से 30°C तापमान पर अच्छी वृद्धि करते हैं। |
| Moisture | अधिक नमी कवकों की वृद्धि को बढ़ावा देती है। |
| Food Supply | पर्याप्त कार्बनिक पदार्थ उपलब्ध होने पर वृद्धि अधिक होती है। |
| pH | अधिकांश Fungi अम्लीय माध्यम (Acidic Medium) में अच्छी वृद्धि करते हैं। |
| Oxygen | अधिकांश कवकों को वृद्धि के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। |
10. Fungi का आवास (Habitat of Fungi)
Fungi पृथ्वी के लगभग सभी भागों में पाए जाते हैं। इनकी अनुकूलन क्षमता (Adaptability) अत्यधिक होती है, इसलिए ये विभिन्न प्रकार के पर्यावरण में जीवित रह सकते हैं।
कवक विशेष रूप से ऐसे स्थानों पर अधिक पाए जाते हैं जहाँ नमी और कार्बनिक पदार्थों की प्रचुरता होती है।
- मिट्टी (Soil)
- जल (Water)
- सड़े-गले पदार्थ
- पौधों एवं जन्तुओं के शरीर
- भोजन सामग्री
- लकड़ी, पत्तियाँ तथा खाद
11. Fungi के विभिन्न प्रकार के निवास स्थान (Different Habitats of Fungi)
| निवास स्थान | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| Terrestrial Fungi | भूमि पर पाए जाते हैं। | Aspergillus, Penicillium |
| Aquatic Fungi | जल में पाए जाते हैं। | Saprolegnia |
| Parasitic Fungi | जीवित जीवों पर निर्भर रहते हैं। | Puccinia |
| Saprophytic Fungi | मृत पदार्थों पर रहते हैं। | Rhizopus |
| Symbiotic Fungi | अन्य जीवों के साथ सहजीवी संबंध बनाते हैं। | Lichen, Mycorrhiza |
| Coprophilous Fungi | पशुओं के मल पर उगते हैं। | Pilobolus |
12. Fungi के उदाहरण (Examples of Fungi)
कुछ प्रमुख कवकों के उदाहरण निम्नलिखित हैं:
- Rhizopus — रोटी पर उगने वाली काली फफूँदी
- Mucor — सड़ते हुए फलों पर पाया जाता है
- Yeast (Saccharomyces) — ब्रेड एवं अल्कोहल निर्माण में उपयोगी
- Penicillium — एंटीबायोटिक उत्पादन में उपयोगी
- Aspergillus — विभिन्न उद्योगों में उपयोगी
- Agaricus — खाने योग्य मशरूम
- Puccinia — गेहूँ में रतुआ रोग उत्पन्न करता है
13. प्रकृति में Fungi का महत्व (Importance of Fungi in Nature)
प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में Fungi की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
(i) अपघटक (Decomposers) के रूप में
कवक मृत पौधों और जन्तुओं का विघटन करके जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में परिवर्तित करते हैं।
(ii) पोषक चक्र (Nutrient Cycling)
Fungi कार्बन, नाइट्रोजन तथा फॉस्फोरस जैसे तत्वों को पुनः पर्यावरण में वापस लाते हैं।
(iii) सहजीवी सम्बन्ध
कई Fungi पौधों की जड़ों के साथ Mycorrhiza बनाते हैं, जिससे पौधों को जल और खनिजों का अवशोषण करने में सहायता मिलती है।
यदि Fungi पृथ्वी पर न हों, तो मृत जैविक पदार्थों का ढेर लग जाएगा और पोषक चक्र बाधित हो जाएगा।
14. कृषि में Fungi का महत्व (Importance in Agriculture)
लाभ
- Mycorrhiza पौधों की वृद्धि में सहायता करता है।
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायता करता है।
- जैव उर्वरक (Biofertilizer) के रूप में उपयोग।
हानि
- फसलों में अनेक रोग उत्पन्न करते हैं।
- भंडारित अनाज को खराब कर देते हैं।
- उत्पादन में भारी कमी ला सकते हैं।
15. उद्योगों में Fungi का उपयोग (Industrial Uses of Fungi)
| उद्योग | उपयोगी Fungus | उत्पाद |
|---|---|---|
| Alcohol Industry | Saccharomyces cerevisiae | Alcohol, Ethanol |
| Organic Acid Industry | Aspergillus niger | Citric Acid |
| Enzyme Industry | Aspergillus | Enzymes |
16. खाद्य उद्योग में Fungi की भूमिका
- Yeast का उपयोग ब्रेड, केक और बिस्किट बनाने में किया जाता है।
- मशरूम पौष्टिक भोजन के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
- कुछ प्रकार के चीज़ (Cheese) बनाने में Penicillium का उपयोग होता है।
- Fermented Foods के निर्माण में भी Fungi उपयोगी हैं।
17. औषधि निर्माण में Fungi का महत्व
कई महत्वपूर्ण औषधियाँ Fungi से प्राप्त की जाती हैं।
| Fungus | औषधि | उपयोग |
|---|---|---|
| Penicillium notatum | Penicillin | एंटीबायोटिक |
| Claviceps purpurea | Ergot Alkaloids | औषधीय उपयोग |
| Tolypocladium inflatum | Cyclosporin | प्रतिरक्षा दमनकारी औषधि |
18. हानिकारक Fungi (Harmful Fungi)
सभी Fungi लाभकारी नहीं होते। कुछ Fungi मनुष्य, पौधों तथा पशुओं के लिए हानिकारक होते हैं।
- भोजन को खराब करते हैं।
- फसलों को नष्ट करते हैं।
- विषैले पदार्थ (Mycotoxins) उत्पन्न करते हैं।
- रोग उत्पन्न करते हैं।
19. पौधों में रोग उत्पन्न करने वाले Fungi
| Fungus | रोग | पौधा |
|---|---|---|
| Puccinia graminis | Rust Disease | गेहूँ |
| Ustilago maydis | Smut Disease | मक्का |
| Albugo candida | White Rust | सरसों |
| Alternaria solani | Early Blight | आलू |
20. मानव रोग उत्पन्न करने वाले Fungi
| Fungus | रोग |
|---|---|
| Candida albicans | Candidiasis |
| Trichophyton | Ringworm (दाद) |
| Microsporum | त्वचा संक्रमण |
| Aspergillus fumigatus | Aspergillosis |
21. Fungi का आर्थिक महत्व (Economic Importance of Fungi)
(A) लाभ (Advantages)
- खाद्य पदार्थों के निर्माण में उपयोग।
- औषधियों के निर्माण में उपयोग।
- जैव उर्वरक के रूप में उपयोग।
- औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में उपयोग।
- कार्बनिक पदार्थों के अपघटन में सहायता।
(B) हानि (Disadvantages)
- फसल रोग उत्पन्न करते हैं।
- भंडारित खाद्य पदार्थों को नष्ट करते हैं।
- मनुष्यों एवं पशुओं में रोग उत्पन्न करते हैं।
- विषैले पदार्थ उत्पन्न करते हैं।
| क्षेत्र | Fungi की भूमिका |
|---|---|
| प्रकृति | अपघटक एवं पोषक चक्र |
| कृषि | जैव उर्वरक तथा रोगजनक दोनों |
| खाद्य उद्योग | ब्रेड, चीज़, मशरूम उत्पादन |
| औषधि उद्योग | Penicillin, Cyclosporin आदि |
| उद्योग | Alcohol, Organic Acid, Enzyme उत्पादन |
🌿 Thallus Organization in Fungi 🌿
Thallus वह साधारण वानस्पतिक शरीर (Vegetative Body) होता है जिसमें वास्तविक जड़ (Root), तना (Stem) तथा पत्ती (Leaf) का विभेदन नहीं होता।
🔹 Thallus क्या होता है?
सामान्य रूप से पौधों में शरीर जड़, तना और पत्ती में विभाजित होता है। लेकिन कुछ जीव ऐसे होते हैं जिनमें यह विभेदन नहीं पाया जाता। ऐसे सरल शरीर को Thallus कहते हैं।
Fungi, Algae तथा Lichens में पाया जाने वाला शरीर प्रायः Thalloid Body कहलाता है।
कवकों में Thallus अत्यन्त सरल से लेकर अत्यधिक विकसित रूप तक पाया जाता है।
🔹 Fungal Thallus की परिभाषा
Fungal Thallus कवक का वह वानस्पतिक शरीर है जिसमें वास्तविक जड़, तना तथा पत्तियाँ अनुपस्थित होती हैं तथा जो पोषण, वृद्धि एवं जनन जैसी क्रियाएँ सम्पन्न करता है।
यह शरीर एक कोशिका से बना हो सकता है अथवा अनेक धागेनुमा संरचनाओं (Hyphae) से मिलकर बना हो सकता है।
Fungi में पाया जाने वाला सम्पूर्ण शरीर सामान्यतः Thallus कहलाता है।
🔹 Fungal Body का सामान्य संगठन
कवकों का शरीर अत्यन्त विविधता प्रदर्शित करता है। विभिन्न कवकों में शरीर की संरचना अलग-अलग प्रकार की हो सकती है।
सामान्यतः Fungal Thallus निम्न प्रकार का हो सकता है:
- Unicellular Thallus
- Plasmodial Thallus
- Pseudoplasmodial Thallus
- Filamentous Thallus
🔹 Unicellular Thallus
जब सम्पूर्ण कवकीय शरीर केवल एक कोशिका से बना होता है, तब उसे Unicellular Thallus कहते हैं।
इस प्रकार के Thallus में एक ही कोशिका सभी जैविक क्रियाएँ सम्पन्न करती है।
ये कोशिकाएँ प्रायः अण्डाकार या गोलाकार होती हैं।
विशेषताएँ
- शरीर केवल एक कोशिका का बना होता है।
- कोशिका स्वतन्त्र रूप से जीवित रहती है।
- इनमें Hyphae अनुपस्थित होते हैं।
- प्रजनन मुख्यतः Budding द्वारा होता है।
Saccharomyces cerevisiae (Yeast)
🔹 Plasmodial Thallus
कुछ आदिम कवकों में शरीर नग्न बहुनाभिकीय द्रव्य (Multinucleate Mass) के रूप में पाया जाता है। इसे Plasmodial Thallus कहते हैं।
इसमें कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है और सम्पूर्ण शरीर जीवद्रव्य (Protoplasm) का एक बड़ा द्रव्यमान होता है।
विशेषताएँ
- कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है।
- बहुनाभिकीय संरचना होती है।
- जीवद्रव्य एक सतत द्रव्यमान के रूप में उपस्थित रहता है।
- यह अमीबा की भाँति गति कर सकता है।
Physarum, Fuligo
🔹 Pseudoplasmodial Thallus
कुछ कवकों में स्वतंत्र अमीबाकार कोशिकाएँ एकत्रित होकर एक अस्थायी बहुकोशिकीय संरचना बनाती हैं, जिसे Pseudoplasmodium कहा जाता है।
यह वास्तविक Plasmodium नहीं होता क्योंकि इसमें प्रत्येक कोशिका अपनी स्वतंत्रता बनाए रखती है।
विशेषताएँ
- कई अमीबाकार कोशिकाओं के समूह से बनता है।
- प्रत्येक कोशिका स्वतंत्र रहती है।
- यह अस्थायी संरचना होती है।
Dictyostelium
🔹 Filamentous Thallus
अधिकांश कवकों में शरीर धागेनुमा संरचनाओं से बना होता है। इन धागेनुमा संरचनाओं को Hyphae कहते हैं।
अनेक Hyphae मिलकर Mycelium का निर्माण करती हैं।
यह कवकों में पाया जाने वाला सबसे सामान्य प्रकार का Thallus है।
अधिकांश उच्च श्रेणी के कवकों में Filamentous Thallus पाया जाता है।
🔹 Hypha की परिभाषा
Hypha कवक की मूल धागेनुमा, बेलनाकार तथा शाखायुक्त संरचना होती है, जो वृद्धि, पोषण तथा प्रजनन का कार्य करती है।
Hypha लगातार बढ़ती रहती है तथा नई शाखाएँ उत्पन्न करती रहती है।
🔹 Hypha के प्रकार
संरचना के आधार पर Hypha दो मुख्य प्रकार की होती हैं:
- Septate Hypha
- Aseptate / Coenocytic Hypha
🔹 Septate Hypha
जिन Hyphae में अनुप्रस्थ विभाजक भित्तियाँ (Septa) उपस्थित होती हैं उन्हें Septate Hyphae कहा जाता है।
Septa Hypha को कई कोशिकाओं में विभाजित कर देते हैं।
विशेषताएँ
- Septa उपस्थित होते हैं।
- प्रत्येक खण्ड में एक या अधिक नाभिक पाए जा सकते हैं।
- Septa में प्रायः छिद्र (Pores) पाए जाते हैं।
Aspergillus, Penicillium, Agaricus
🔹 Aseptate / Coenocytic Hypha
जिन Hyphae में Septa अनुपस्थित होते हैं उन्हें Aseptate Hypha कहते हैं।
इनमें सम्पूर्ण Hypha एक सतत बहुनाभिकीय नलिका के समान होती है।
विशेषताएँ
- Septa अनुपस्थित होते हैं।
- बहुनाभिकीय अवस्था पाई जाती है।
- जीवद्रव्य सतत रूप से फैला रहता है।
Rhizopus, Mucor
🔹 Septate एवं Coenocytic Hypha में अंतर
| आधार | Septate Hypha | Coenocytic Hypha |
|---|---|---|
| Septa | उपस्थित | अनुपस्थित |
| कोशिकाएँ | अनेक कोशिकाएँ | सतत नलिका |
| नाभिक | प्रत्येक कोशिका में | बहुनाभिकीय |
| उदाहरण | Aspergillus | Rhizopus |
🔹 Septum की संरचना एवं कार्य (Structure and Functions of Septum)
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🌟 आपका अपना Sir - Kaushal Kumar
⬇️ Notes PDF डाउनलोड करेंहालाँकि Septa Hypha को कई भागों में बाँट देते हैं, लेकिन ये भाग पूर्णतः अलग नहीं होते। अधिकांश Septa के मध्य में एक छोटा छिद्र (Septal Pore) पाया जाता है।
इस छिद्र के माध्यम से कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm), पोषक पदार्थ, एंजाइम तथा कभी-कभी नाभिक भी एक कोशिका से दूसरी कोशिका में जा सकते हैं।
Septum वह विभाजक भित्ति है जो Hypha को अलग-अलग कोशिकीय खण्डों में विभाजित करती है।
Septum की संरचना
- Septum मुख्यतः Chitin तथा अन्य कोशिका भित्ति पदार्थों से बना होता है।
- इसके मध्य में एक या अधिक Pores (छिद्र) पाए जाते हैं।
- उच्च कवकों (Basidiomycetes) में विशेष प्रकार का Dolipore Septum पाया जाता है।
- कुछ कवकों में Septal Pore के ऊपर विशेष संरचना Parenthesome पाई जाती है।
Septum के कार्य
| कार्य | विवरण |
|---|---|
| कोशिकीय विभाजन | Hypha को अनेक खण्डों में विभाजित करता है। |
| सुरक्षा | क्षतिग्रस्त भाग को अलग करके शेष Hypha की रक्षा करता है। |
| पदार्थों का परिवहन | Septal Pore के माध्यम से पदार्थों का आदान-प्रदान होता है। |
| वृद्धि नियंत्रण | कोशिकाओं की वृद्धि एवं संगठन में सहायता करता है। |
🔹 Mycelium क्या है?
कवक के शरीर में उपस्थित अनेक Hyphae मिलकर जो जाल जैसी संरचना बनाती हैं, उसे Mycelium कहते हैं।
Mycelium वास्तव में कवक का मुख्य वानस्पतिक शरीर (Vegetative Body) होता है।
इसी के माध्यम से कवक पोषण प्राप्त करता है, वृद्धि करता है तथा विभिन्न संरचनाओं का निर्माण करता है।
Hypha + Hypha + Hypha = Mycelium
🔹 Mycelium के प्रकार (Types of Mycelium)
नाभिकीय अवस्था तथा विकास के आधार पर Mycelium को विभिन्न प्रकारों में बाँटा जाता है।
- Primary Mycelium
- Secondary Mycelium
- Tertiary Mycelium
- Homokaryotic Mycelium
- Dikaryotic Mycelium
🔹 Primary Mycelium
बीजाणु (Spore) के अंकुरण से जो प्रारम्भिक Mycelium बनता है, उसे Primary Mycelium कहते हैं।
यह सामान्यतः अल्पकालिक (Short-lived) होता है।
इसकी प्रत्येक कोशिका में केवल एक प्रकार का नाभिक पाया जाता है।
विशेषताएँ
- Spore के अंकुरण से बनता है।
- प्रायः Monokaryotic होता है।
- अल्पकालिक होता है।
Basidiomycetes में Basidiospore के अंकुरण से बनने वाला Mycelium।
🔹 Secondary Mycelium
जब दो अनुकूल Primary Mycelia आपस में संलयित (Fusion) होते हैं, तब Secondary Mycelium बनता है।
इसकी प्रत्येक कोशिका में दो भिन्न नाभिक उपस्थित रहते हैं।
यह अवस्था कवकों में अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है।
विशेषताएँ
- दो Primary Mycelia के संयोग से बनता है।
- प्रत्येक कोशिका में दो नाभिक होते हैं।
- दीर्घजीवी (Long-lived) होता है।
Secondary Mycelium = Dikaryotic Stage
🔹 Tertiary Mycelium
जब Secondary Mycelium अत्यधिक सघन होकर जटिल संरचनाओं का निर्माण करता है, तब उसे Tertiary Mycelium कहते हैं।
इसी से फलनकाय (Fruiting Body) का निर्माण होता है।
विशेषताएँ
- सघन एवं सुव्यवस्थित Mycelium।
- फलनकाय निर्माण करता है।
- उच्च कवकों में पाया जाता है।
Agaricus (Mushroom) का फलनकाय।
🔹 Homokaryotic Mycelium
जिस Mycelium की सभी कोशिकाओं में आनुवंशिक रूप से समान नाभिक उपस्थित हों, उसे Homokaryotic Mycelium कहते हैं।
इसमें उपस्थित सभी नाभिक एक ही प्रकार के होते हैं।
उदाहरण :
Primary Mycelium सामान्यतः Homokaryotic होता है।
🔹 Dikaryotic Mycelium
जिस Mycelium की प्रत्येक कोशिका में दो आनुवंशिक रूप से भिन्न नाभिक उपस्थित हों, उसे Dikaryotic Mycelium कहते हैं।
यह अवस्था विशेष रूप से Ascomycetes तथा Basidiomycetes में पाई जाती है।
उदाहरण :
Secondary Mycelium प्रायः Dikaryotic होता है।
🔹 Homokaryotic एवं Dikaryotic Mycelium में अंतर
| आधार | Homokaryotic Mycelium | Dikaryotic Mycelium |
|---|---|---|
| नाभिक | समान प्रकार के | दो भिन्न प्रकार के |
| कोशिका अवस्था | Monokaryotic | Dikaryotic |
| जीवनकाल | अल्पकालिक | दीर्घकालिक |
| उदाहरण | Primary Mycelium | Secondary Mycelium |
🔹 Hyphal Modifications
विशिष्ट कार्यों को सम्पन्न करने के लिए Hyphae अनेक प्रकार के रूपान्तरण (Modification) प्रदर्शित करती हैं। इन्हें Hyphal Modifications कहा जाता है।
🔹 Rhizoid
जड़ जैसी पतली शाखित संरचनाएँ, जो कवक को आधार से चिपकाने एवं पोषण अवशोषण में सहायता करती हैं, Rhizoids कहलाती हैं।
कार्य : संलग्नता (Anchorage) एवं अवशोषण।
उदाहरण : Rhizopus
🔹 Stolon
भूमि की सतह के समानान्तर फैलने वाली क्षैतिज Hypha को Stolon कहते हैं।
कार्य : कवक का तीव्र प्रसार।
उदाहरण : Rhizopus
🔹 Haustorium
परजीवी कवकों में पाई जाने वाली विशेष अवशोषक संरचना को Haustorium कहते हैं।
यह परपोषी (Host) की कोशिकाओं के भीतर प्रवेश करके भोजन अवशोषित करती है।
कार्य : पोषण प्राप्त करना।
उदाहरण : Puccinia, Albugo
🔹 Appressorium
परजीवी कवकों में पाई जाने वाली चपटी अथवा सूजी हुई संरचना, जो Host की सतह पर चिपकने का कार्य करती है, Appressorium कहलाती है।
कार्य : Host से चिपकना एवं संक्रमण प्रारम्भ करना।
उदाहरण : Colletotrichum
🔹 Rhizomorph
जब अनेक Hyphae मिलकर जड़ जैसी मोटी रस्सीनुमा संरचना बनाती हैं, तब उसे Rhizomorph कहते हैं।
कार्य : भोजन संचरण तथा प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहना।
उदाहरण : Armillaria
🔹 Sclerotium
Hyphae का कठोर, सघन एवं विश्रामशील (Resting) समूह Sclerotium कहलाता है।
यह प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहने की विशेष संरचना है।
कार्य : Perennation (जीवित बने रहना)।
उदाहरण : Claviceps
🔹 Plectenchyma
जब अनेक Hyphae आपस में सघन रूप से जुड़कर ऊतक जैसी संरचना बनाती हैं, तब उसे Plectenchyma कहते हैं।
यह दो प्रकार का होता है:
- Prosenchyma
- Pseudoparenchyma
कार्य : यांत्रिक दृढ़ता प्रदान करना।
उदाहरण : Mushroom Fruit Body
🔹 Stroma
Hyphae का सघन, गद्दीनुमा अथवा चटाई जैसी संरचना Stroma कहलाती है।
इसी पर प्रजनन संरचनाएँ विकसित होती हैं।
कार्य : Reproductive Structures को धारण करना।
उदाहरण : Claviceps
🔹 Fungal Thallus की विभिन्न संरचनाओं के कार्य
| संरचना | मुख्य कार्य | उदाहरण |
|---|---|---|
| Rhizoid | अवशोषण एवं संलग्नता | Rhizopus |
| Stolon | प्रसार | Rhizopus |
| Haustorium | पोषण अवशोषण | Puccinia |
| Appressorium | Host से चिपकना | Colletotrichum |
| Rhizomorph | भोजन संचरण | Armillaria |
| Sclerotium | प्रतिकूल दशाओं में जीवित रहना | Claviceps |
| Plectenchyma | ऊतक निर्माण | Mushroom |
| Stroma | जनन संरचनाओं को धारण करना | Claviceps |
🍄 Nutrition in Fungi 🍄
Nutrition वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई जीव भोजन प्राप्त करता है, उसका उपयोग ऊर्जा प्राप्त करने, वृद्धि करने तथा शरीर के रख-रखाव के लिए करता है।
🔹 Nutrition की सामान्य अवधारणा (General Concept of Nutrition)
सभी जीवों को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। भोजन से ही जीवों को ऊर्जा (Energy), वृद्धि (Growth), मरम्मत (Repair) तथा प्रजनन (Reproduction) के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं।
पोषण जीवों की सबसे महत्वपूर्ण जीवन प्रक्रियाओं में से एक है। यदि किसी जीव को पर्याप्त भोजन न मिले, तो उसकी वृद्धि रुक जाती है और अंततः वह मर सकता है।
जीवों में पोषण मुख्यतः दो प्रकार का होता है:
- Autotrophic Nutrition (स्वपोषी पोषण)
- Heterotrophic Nutrition (विषमपोषी पोषण)
पौधे सामान्यतः स्वपोषी होते हैं, जबकि कवक (Fungi) विषमपोषी होते हैं।
🔹 Fungi में पोषण की विशेषताएँ (Characteristics of Nutrition in Fungi)
कवकों का पोषण अन्य जीवों से भिन्न होता है। ये अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते, इसलिए इन्हें बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।
- Fungi में Chlorophyll अनुपस्थित होता है।
- ये प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकते।
- ये बाहरी कार्बनिक पदार्थों से भोजन प्राप्त करते हैं।
- इनका पोषण मुख्यतः Absorptive Nutrition पर आधारित होता है।
- ये भोजन को शरीर के बाहर पचाते हैं।
- Fungi विशेष प्रकार के Enzymes स्रावित करते हैं।
Fungi भोजन को पहले बाहर पचाते हैं और फिर घुले हुए पोषक पदार्थों को अवशोषित करते हैं।
🔹 Fungi को Heterotrophic क्यों कहा जाता है?
Fungi को Heterotrophic Organisms कहा जाता है क्योंकि ये अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते।
इनकी कोशिकाओं में Chlorophyll नामक हरा वर्णक अनुपस्थित होता है। परिणामस्वरूप ये Photosynthesis नहीं कर पाते।
इसलिए Fungi को भोजन के लिए अन्य जीवों, मृत कार्बनिक पदार्थों या जीवित परपोषियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
Rhizopus रोटी पर उगने वाली फफूँदी है। यह रोटी में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों से भोजन प्राप्त करती है।
🔹 Absorptive Nutrition क्या है?
जब कोई जीव भोजन को पहले सरल घुलनशील पदार्थों में परिवर्तित करता है और फिर उन्हें अपनी कोशिकाओं द्वारा अवशोषित करता है, तो इस प्रकार के पोषण को Absorptive Nutrition कहते हैं।
Fungi में यही पोषण पद्धति पाई जाती है।
Absorptive Nutrition वह प्रक्रिया है जिसमें भोजन को पहले बाह्य रूप से पचाया जाता है और बाद में घुलनशील पोषक पदार्थों को अवशोषित किया जाता है।
🔹 Fungi भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?
Fungi अपने आसपास उपस्थित कार्बनिक पदार्थों पर विशेष प्रकार के पाचक एंजाइम छोड़ते हैं।
ये एंजाइम जटिल पदार्थों को सरल घुलनशील पदार्थों में बदल देते हैं।
इसके बाद ये घुलनशील पदार्थ Hyphae की कोशिकाओं द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं।
Flowchart
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Fungal Enzymes का स्राव
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बाह्य पाचन (External Digestion)
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सरल घुलनशील पदार्थों का निर्माण
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Hyphae द्वारा अवशोषण
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ऊर्जा एवं वृद्धि
🔹 Extracellular Digestion क्या है?
Fungi में भोजन का पाचन शरीर के बाहर होता है। इस प्रक्रिया को Extracellular Digestion कहते हैं।
कवक अपने शरीर से बाहर विभिन्न एंजाइम छोड़ते हैं। ये एंजाइम मृत या जीवित कार्बनिक पदार्थों को तोड़कर छोटे अणुओं में परिवर्तित कर देते हैं।
इस प्रकार का पाचन Fungi की एक अत्यंत महत्वपूर्ण विशेषता है।
🔹 Enzymes की भूमिका (Role of Enzymes)
Enzymes जैव उत्प्रेरक (Biological Catalysts) होते हैं, जो रासायनिक अभिक्रियाओं की गति को बढ़ाते हैं।
Fungi में Enzymes भोजन के पाचन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
| Enzyme | कार्य |
|---|---|
| Cellulase | Cellulose का विघटन |
| Pectinase | Pectin का विघटन |
| Amylase | Starch का विघटन |
| Protease | Protein का विघटन |
| Lipase | Fats का विघटन |
| Ligninase | Lignin का विघटन |
🌿 Fungi में पोषण के प्रकार 🌿
🔹 Saprophytic Nutrition
जब Fungi मृत एवं सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों से भोजन प्राप्त करते हैं, तो इसे Saprophytic Nutrition कहते हैं।
ऐसे कवकों को Saprophytes कहा जाता है।
कार्य करने की प्रक्रिया
Saprophytic Fungi मृत पौधों, गिरे हुए पत्तों, लकड़ी, फलों, सब्जियों तथा मृत जीवों पर उगते हैं।
ये अपने Hyphae से एंजाइम स्रावित करते हैं, जो जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में बदल देते हैं।
बाद में ये सरल पदार्थ कवक द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं।
मृत कार्बनिक पदार्थों का अपघटन
कवक पृथ्वी पर मृत कार्बनिक पदार्थों को विघटित करने वाले सबसे महत्वपूर्ण जीव हैं।
यदि Saprophytic Fungi न हों, तो पृथ्वी पर मृत पौधों और जानवरों का विशाल ढेर लग जाएगा।
उदाहरण
- Rhizopus
- Mucor
- Penicillium
- Aspergillus
पारिस्थितिक महत्व
- जैव अपघटन करते हैं।
- पोषक तत्वों को पुनः मिट्टी में वापस पहुँचाते हैं।
- Carbon Cycle को बनाए रखते हैं।
आर्थिक महत्व
- कम्पोस्ट निर्माण में सहायक।
- कचरा प्रबंधन में उपयोगी।
- जैव उर्वरक निर्माण में सहायक।
🔹 Parasitic Nutrition
जब कोई Fungus जीवित जीव से भोजन प्राप्त करता है और उसे हानि पहुँचाता है, तो इसे Parasitic Nutrition कहते हैं।
ऐसे कवकों को Parasitic Fungi कहा जाता है।
जिस जीव से भोजन प्राप्त किया जाता है, उसे Host कहते हैं।
भोजन प्राप्त करने वाले जीव को Parasite कहते हैं।
Parasitism क्या है?
दो जीवों के बीच ऐसा सम्बन्ध जिसमें एक जीव लाभ प्राप्त करता है और दूसरा हानि उठाता है, Parasitism कहलाता है।
उदाहरण
- Puccinia – गेहूँ का रतुआ रोग
- Ustilago – स्मट रोग
- Albugo – श्वेत किट्ट रोग
🔹 Obligate Parasite (अनिवार्य परजीवी)
कुछ कवक ऐसे होते हैं जो केवल जीवित Host पर ही जीवित रह सकते हैं। ये मृत कार्बनिक पदार्थों पर वृद्धि नहीं कर सकते। ऐसे कवकों को Obligate Parasites या True Parasites कहा जाता है।
ये कवक अपने Host की जीवित कोशिकाओं से भोजन प्राप्त करते हैं और सामान्यतः Haustoria नामक विशेष संरचना का निर्माण करते हैं।
Obligate Parasites वे कवक हैं जो अपना सम्पूर्ण जीवन केवल जीवित Host पर व्यतीत करते हैं।
उदाहरण
- Puccinia graminis (Wheat Rust Fungus)
- Erysiphe (Powdery Mildew Fungus)
- Peronospora
🔹 Facultative Parasite
ऐसे कवक सामान्यतः मृत कार्बनिक पदार्थों पर जीवनयापन करते हैं, लेकिन अनुकूल परिस्थितियों में जीवित Host पर परजीवी के रूप में भी रहने लगते हैं।
अर्थात् ये सामान्यतः Saprophytes होते हैं, परन्तु आवश्यकता पड़ने पर परजीवी बन जाते हैं।
Saprophyte → Parasite
यही Facultative Parasite की मुख्य विशेषता है।
उदाहरण
- Fusarium spp.
- Pythium spp.
🔹 Facultative Saprophyte
कुछ कवक सामान्यतः परजीवी होते हैं, लेकिन Host की मृत्यु के बाद वे मृत ऊतकों पर भी वृद्धि कर सकते हैं। ऐसे कवकों को Facultative Saprophytes कहते हैं।
अर्थात् ये सामान्यतः Parasite होते हैं, परन्तु आवश्यकता पड़ने पर Saprophyte की तरह भी जीवनयापन कर सकते हैं।
Parasite → Saprophyte
यही Facultative Saprophyte की विशेषता है।
उदाहरण
- Taphrina deformans
- Venturia inaequalis
🔹 Biotrophic Parasite
ऐसे परजीवी कवक Host की कोशिकाओं को जीवित रखते हुए उनसे पोषण प्राप्त करते हैं। ये Host कोशिकाओं को तुरंत नष्ट नहीं करते।
Biotrophic Parasites सामान्यतः Host के साथ दीर्घकालिक सम्बन्ध स्थापित करते हैं।
विशेषताएँ
- Host कोशिकाएँ जीवित रहती हैं।
- Haustoria का निर्माण करते हैं।
- Host की कोशिकाओं से धीरे-धीरे पोषण प्राप्त करते हैं।
उदाहरण
- Puccinia
- Erysiphe
🔹 Necrotrophic Parasite
ऐसे परजीवी पहले Host कोशिकाओं को मार देते हैं और उसके बाद मृत ऊतकों से भोजन प्राप्त करते हैं।
ये शक्तिशाली एंजाइम तथा विषैले पदार्थ (Toxins) उत्पन्न करते हैं।
विशेषताएँ
- Host कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं।
- मृत ऊतकों पर भोजन प्राप्त करते हैं।
- रोगों की तीव्रता अधिक होती है।
उदाहरण
- Botrytis cinerea
- Alternaria solani
🔹 पौधों में रोग उत्पन्न करने वाले कवक
| कवक | रोग | Host |
|---|---|---|
| Puccinia graminis | Rust Disease | गेहूँ |
| Ustilago maydis | Smut Disease | मक्का |
| Alternaria solani | Early Blight | आलू |
| Albugo candida | White Rust | सरसों |
🔹 Symbiotic Nutrition
जब दो भिन्न जीव एक साथ रहकर एक-दूसरे को लाभ पहुँचाते हैं, तब इस प्रकार के पोषण को Symbiotic Nutrition कहते हैं।
इस प्रकार के सम्बन्ध को Symbiosis कहते हैं।
🔹 Mutualism क्या है?
जब Symbiosis में दोनों जीवों को लाभ होता है, तब उसे Mutualism कहते हैं।
Fungi में Mutualism अत्यधिक विकसित पाया जाता है।
🔹 Fungi एवं अन्य जीवों के बीच सहजीविता
Fungi शैवाल, पौधों तथा अन्य जीवों के साथ सहजीवी सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं।
दो प्रमुख उदाहरण हैं:
- Lichen
- Mycorrhiza
🔹 Lichen का संक्षिप्त परिचय
Lichen एक सहजीवी संगठन है जिसमें एक Fungus तथा एक Alga या Cyanobacterium साथ रहते हैं।
शैवाल भोजन बनाता है, जबकि Fungus जल, खनिज एवं सुरक्षा प्रदान करता है।
Parmelia, Usnea, Cladonia
🔹 Mycorrhiza का संक्षिप्त परिचय
Mycorrhiza पौधों की जड़ों तथा कवकों के बीच पाया जाने वाला सहजीवी सम्बन्ध है।
कवक पौधे की जड़ों से भोजन प्राप्त करता है, जबकि पौधे को जल एवं खनिजों का अवशोषण करने में सहायता करता है।
Mycorrhiza के लाभ
- फॉस्फोरस का अवशोषण बढ़ाता है।
- पौधों की वृद्धि में सहायता करता है।
- सूखा सहनशीलता बढ़ाता है।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
🔹 कृषि में महत्व
- Mycorrhiza जैव उर्वरक (Biofertilizer) के रूप में कार्य करता है।
- फसलों की उत्पादकता बढ़ाता है।
- रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम करता है।
🔹 पारिस्थितिक महत्व
- मृदा उर्वरता बनाए रखते हैं।
- पोषक चक्र में भाग लेते हैं।
- पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता बनाए रखते हैं।
🔹 Predacious Nutrition
जब कवक छोटे जीवों को पकड़कर उनका भक्षण करते हैं, तब इस प्रकार के पोषण को Predacious Nutrition कहते हैं।
ऐसे कवकों को Predatory Fungi कहा जाता है।
🔹 Predatory Fungi क्या होते हैं?
ये कवक विशेष रूप से मृदा में पाए जाने वाले छोटे जन्तुओं, विशेषकर Nematodes को पकड़कर उनसे पोषण प्राप्त करते हैं।
🔹 Nematode Trapping Fungi
कुछ कवक विशेष प्रकार के Trap बनाते हैं, जिनकी सहायता से वे Nematodes को पकड़ लेते हैं।
Trap के प्रकार
| Trap का प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| Adhesive Network | चिपचिपे जाल का निर्माण |
| Adhesive Knobs | चिपचिपी गांठों द्वारा पकड़ना |
| Constricting Rings | संकुचित होकर Nematode को फँसाना |
उदाहरण
- Arthrobotrys
- Dactylaria
🔹 कृषि में महत्व
Predatory Fungi मृदा में उपस्थित हानिकारक Nematodes की संख्या को कम करते हैं।
इस कारण इनका उपयोग Biological Control Agents के रूप में किया जाता है।
🔹 Fungi द्वारा पोषक तत्वों का अवशोषण
Fungi अपने Hyphae की सतह द्वारा घुले हुए पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं।
अवशोषण मुख्यतः Diffusion, Facilitated Diffusion तथा Active Transport द्वारा होता है।
🔹 Fungal Enzymes के प्रकार
| Enzyme | कार्य |
|---|---|
| Cellulase | Cellulose का विघटन |
| Protease | Protein का विघटन |
| Lipase | वसा का विघटन |
| Pectinase | Pectin का विघटन |
| Amylase | Starch का विघटन |
🔹 Fungi के पोषण का पारिस्थितिक महत्व
- जैव अपघटन में सहायक।
- पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण।
- मृदा उर्वरता बनाए रखना।
- पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना।
🔹 Carbon Cycle में Fungi की भूमिका
Fungi मृत कार्बनिक पदार्थों का विघटन करके कार्बन को पुनः वातावरण एवं मिट्टी में वापस पहुँचाते हैं।
इस प्रकार वे Carbon Cycle को निरंतर बनाए रखते हैं।
🔹 Decomposer के रूप में Fungi
Fungi पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण Decomposers हैं। ये मृत पौधों एवं जन्तुओं को विघटित करके पोषक तत्वों को पुनः पर्यावरण में वापस पहुँचाते हैं।
🔹 Fungal Nutrition का आर्थिक महत्व
| लाभ | हानि |
|---|---|
| जैव उर्वरक निर्माण | फसल रोग उत्पन्न करना |
| कम्पोस्ट निर्माण | भोजन को खराब करना |
| जैव नियंत्रण एजेंट | आर्थिक हानि पहुँचाना |
| अपघटन एवं पोषक चक्र | पौधों में रोग फैलाना |
🔹 Saprophytic, Parasitic, Symbiotic एवं Predacious Nutrition में अंतर
| आधार | Saprophytic | Parasitic | Symbiotic | Predacious |
|---|---|---|---|---|
| भोजन का स्रोत | मृत पदार्थ | जीवित Host | सहजीवी साथी | छोटे जीव |
| Host पर प्रभाव | कोई प्रभाव नहीं | हानिकारक | दोनों लाभान्वित | शिकार की मृत्यु |
| विशेष संरचना | सामान्य Hyphae | Haustoria | Mycorrhiza/Lichen | Trap Structures |
| उदाहरण | Rhizopus | Puccinia | Lichen | Arthrobotrys |
🍄 Cell Wall Composition in Fungi 🍄
Cell Wall कोशिका की सबसे बाहरी कठोर एवं सुरक्षात्मक परत होती है, जो कोशिका को आकार, दृढ़ता तथा सुरक्षा प्रदान करती है।
🔹 Cell Wall का परिचय
सभी जीवित कोशिकाओं को बाहरी वातावरण से सुरक्षा की आवश्यकता होती है। अनेक जीवों में यह कार्य Cell Wall द्वारा किया जाता है।
Cell Wall कोशिका के चारों ओर उपस्थित एक मजबूत, कठोर तथा सुरक्षात्मक आवरण है। यह कोशिका को केवल सुरक्षा ही नहीं प्रदान करता, बल्कि उसकी आकृति (Shape), मजबूती (Rigidity) तथा सामान्य कार्यों को भी नियंत्रित करता है।
पौधों, कवकों (Fungi), शैवालों (Algae) तथा बैक्टीरिया में Cell Wall पाई जाती है, लेकिन इन सभी में इसकी रासायनिक संरचना अलग-अलग होती है।
🔹 Fungal Cell Wall क्या है?
Fungal Cell Wall कवक कोशिका की बाहरी कठोर परत है, जो Plasma Membrane के बाहर स्थित होती है।
यह मुख्य रूप से Polysaccharides, Proteins, Lipids तथा अन्य जैविक पदार्थों से बनी होती है।
पौधों के विपरीत, अधिकांश कवकों की Cell Wall में Chitin पाया जाता है, जो कवकीय कोशिका भित्ति का सबसे महत्वपूर्ण घटक है।
Chitin कवकों की Cell Wall का प्रमुख घटक है, जबकि पौधों में मुख्य घटक Cellulose होता है।
🔹 Cell Wall की आवश्यकता क्यों होती है?
यदि कवकीय कोशिका में Cell Wall उपस्थित न हो, तो कोशिका अपना आकार बनाए नहीं रख पाएगी और बाहरी दाब (Pressure) के कारण फट सकती है।
Cell Wall कवक के जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
Cell Wall की आवश्यकता
- कोशिका को बाहरी क्षति से बचाने के लिए।
- कोशिका को निश्चित आकार प्रदान करने के लिए।
- अत्यधिक जल दाब (Osmotic Pressure) से सुरक्षा हेतु।
- वृद्धि एवं प्रजनन में सहायता के लिए।
- पर्यावरणीय तनावों से रक्षा के लिए।
🔹 Fungal Cell Wall की सामान्य संरचना
कवकों की Cell Wall एक बहुपरत (Multilayered) संरचना होती है। यह कई प्रकार के रासायनिक पदार्थों से मिलकर बनी होती है।
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(Outer Layer + Inner Layer + Plasma Membrane)
🔹 Cell Wall की परतें (Layers of Fungal Cell Wall)
सामान्यतः कवकीय Cell Wall दो प्रमुख परतों से बनी होती है:
- Outer Layer (बाह्य परत)
- Inner Layer (आंतरिक परत)
🔸 Outer Layer (बाह्य परत)
यह Cell Wall की सबसे बाहरी परत होती है। यह अपेक्षाकृत नरम (Soft) तथा लचीली (Flexible) होती है।
इस परत में मुख्यतः निम्न पदार्थ पाए जाते हैं:
- Mannans
- Proteins
- Glycoproteins
- Lipids
यह परत कोशिका एवं बाहरी वातावरण के बीच संपर्क स्थापित करने का कार्य करती है।
🔸 Inner Layer (आंतरिक परत)
यह Cell Wall की मजबूत तथा कठोर परत होती है।
इसमें मुख्यतः निम्न पदार्थ पाए जाते हैं:
- Chitin
- Glucans
- Cellulose (कुछ कवकों में)
यह परत Cell Wall को यांत्रिक दृढ़ता (Mechanical Strength) प्रदान करती है।
🌿 Fungal Cell Wall के प्रमुख घटक 🌿
🔹 A. Chitin
Chitin एक जटिल नाइट्रोजन युक्त Polysaccharide है, जो अधिकांश कवकों की Cell Wall का प्रमुख संरचनात्मक घटक होता है।
रासायनिक प्रकृति (Chemical Nature)
Chitin मुख्य रूप से N-acetyl glucosamine (NAG) इकाइयों से मिलकर बना होता है।
यह एक नाइट्रोजन युक्त बहुशर्करा (Nitrogen Containing Polysaccharide) है।
संरचना (Structure)
Chitin में अनेक N-acetyl glucosamine अणु आपस में β-(1→4) बन्धों द्वारा जुड़े रहते हैं।
"Structure of Chitin Molecule"
कार्य (Functions)
- कोशिका को मजबूती प्रदान करता है।
- कोशिका को निश्चित आकार देता है।
- बाहरी क्षति से सुरक्षा करता है।
- Osmotic Pressure से रक्षा करता है।
महत्व (Importance)
- Fungal Cell Wall का मुख्य संरचनात्मक पदार्थ।
- Antifungal Drugs के लिए लक्ष्य (Target Site)।
- कवकों की पहचान में उपयोगी।
🔹 B. Glucans
Glucans ग्लूकोज अणुओं से बने Polysaccharides होते हैं।
ये Cell Wall का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं।
Beta Glucans (β-Glucans)
इनमें ग्लूकोज अणु β-linkages द्वारा जुड़े होते हैं।
- Cell Wall को मजबूती प्रदान करते हैं।
- Chitin के साथ मिलकर ढांचा बनाते हैं।
- यांत्रिक शक्ति प्रदान करते हैं।
Alpha Glucans (α-Glucans)
इनमें ग्लूकोज अणु α-linkages द्वारा जुड़े रहते हैं।
- Cell Wall की बाहरी संरचना में योगदान देते हैं।
- Host-Fungus Interaction में भाग लेते हैं।
🔹 C. Mannans
Mannans ऐसे Polysaccharides हैं जो मुख्यतः Mannose शर्करा से बने होते हैं।
Mannans सामान्यतः Cell Wall की बाहरी परत में पाए जाते हैं।
कार्य
- कोशिका की सतही संरचना बनाते हैं।
- Host पहचान में सहायता करते हैं।
- Cell Adhesion में भाग लेते हैं।
🔹 D. Proteins
Fungal Cell Wall में अनेक प्रकार के Proteins उपस्थित रहते हैं।
Cell Wall Proteins
- संरचनात्मक मजबूती प्रदान करते हैं।
- Cell-to-Cell Recognition में भाग लेते हैं।
- Adhesion में सहायक होते हैं।
Enzymatic Proteins
ये Cell Wall के निर्माण, विघटन एवं पुनर्निर्माण में भाग लेते हैं।
- Chitin Synthase
- Glucan Synthase
- Hydrolases
🔹 E. Lipids
यद्यपि Cell Wall में Lipids की मात्रा कम होती है, फिर भी ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भूमिका
- Cell Wall की पारगम्यता को नियंत्रित करना।
- Protein Anchoring में सहायता करना।
- सतही स्थिरता बनाए रखना।
महत्व
- कोशिका की संरचनात्मक स्थिरता।
- पर्यावरणीय तनावों से सुरक्षा।
🔹 F. Cellulose
अधिकांश सच्चे कवकों (True Fungi) में Cellulose अनुपस्थित होता है, लेकिन कुछ निम्न कवकों में यह पाया जाता है।
किन कवकों में पाया जाता है?
- Oomycetes
- Water Moulds
महत्व
- Cell Wall को मजबूती प्रदान करता है।
- संरचनात्मक समर्थन देता है।
🔹 G. Pectin एवं अन्य Polysaccharides
कुछ कवकों में कम मात्रा में Pectin, Galactans, Xylans तथा अन्य Polysaccharides भी पाए जाते हैं।
ये पदार्थ Cell Wall की संरचना तथा लचीलापन बनाए रखने में सहायता करते हैं।
🔹 Plant Cell Wall एवं Fungal Cell Wall में अंतर
| आधार | Plant Cell Wall | Fungal Cell Wall |
|---|---|---|
| मुख्य घटक | Cellulose | Chitin |
| अन्य घटक | Pectin, Hemicellulose | Glucans, Mannans |
| नाइट्रोजन | अनुपस्थित | उपस्थित (Chitin में) |
| विशेषता | पौधों में पाई जाती है | कवकों में पाई जाती है |
🔹 Fungal Cell Wall एवं Animal Cell Membrane में अंतर
| आधार | Fungal Cell Wall | Animal Cell Membrane |
|---|---|---|
| स्थिति | Plasma Membrane के बाहर | बाहरी सीमा ही Cell Membrane होती है |
| संरचना | कठोर | लचीली |
| मुख्य घटक | Chitin, Glucans | Lipids, Proteins |
| Cell Wall | उपस्थित | अनुपस्थित |
🔹 Cell Wall के प्रमुख कार्य
- Protection प्रदान करना।
- Shape एवं Rigidity प्रदान करना।
- Osmotic Pressure से सुरक्षा करना।
- कोशिका वृद्धि में सहायता करना।
- प्रजनन संरचनाओं के निर्माण में भाग लेना।
- पर्यावरणीय तनावों से सुरक्षा करना।
🔹 Protection में भूमिका
Cell Wall कवक को यांत्रिक क्षति, सूखेपन, तापमान परिवर्तन तथा रोगजनकों से सुरक्षा प्रदान करती है।
🔹 Shape एवं Rigidity प्रदान करने में भूमिका
Cell Wall ही कवकीय कोशिका को निश्चित आकार एवं कठोरता प्रदान करती है। यदि Cell Wall न हो, तो कोशिका अपना आकार खो देगी।
🔹 Osmotic Pressure से सुरक्षा
कवकीय कोशिकाओं के भीतर घुले हुए पदार्थों की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण जल कोशिका में प्रवेश करता रहता है। Cell Wall कोशिका को फटने से बचाती है।
🔹 Growth में भूमिका
Cell Wall नियंत्रित रूप से फैलती है, जिससे Hyphae की लंबाई में वृद्धि संभव हो पाती है।
🔹 Reproduction में भूमिका
Spore, Fruiting Body तथा अन्य जनन संरचनाओं के निर्माण में Cell Wall महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
🔹 Cell Wall Synthesis की सामान्य प्रक्रिया
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Polysaccharide Synthesis
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Chitin/Glucan Formation
⬇
Cell Wall Assembly
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Mature Cell Wall
Cell Wall का निर्माण मुख्य रूप से Plasma Membrane पर उपस्थित विशेष एंजाइमों जैसे Chitin Synthase एवं Glucan Synthase द्वारा होता है।
🔹 Cell Wall का जैविक महत्व
- कवक के अस्तित्व के लिए आवश्यक।
- कवकों की पहचान एवं वर्गीकरण में सहायक।
- Antifungal Drugs के विकास में उपयोगी।
- Host-Pathogen Interaction में महत्वपूर्ण।
- पर्यावरणीय अनुकूलन में सहायता करता है।
🔹 विभिन्न Fungal Groups में Cell Wall Composition
| Fungal Group | मुख्य Cell Wall Components |
|---|---|
| Chytridiomycetes | Chitin, Glucans |
| Zygomycetes | Chitin, Chitosan |
| Ascomycetes | Chitin, β-Glucans, Mannans |
| Basidiomycetes | Chitin, Glucans |
| Oomycetes | Cellulose, Glucans |
🔹 Chitin एवं Cellulose में अंतर
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⬇️ Notes PDF डाउनलोड करें| आधार | Chitin | Cellulose |
|---|---|---|
| रासायनिक इकाई | N-acetyl glucosamine | Glucose |
| नाइट्रोजन | उपस्थित | अनुपस्थित |
| उपस्थिति | Fungi | Plants |
| प्रकृति | नाइट्रोजन युक्त | नाइट्रोजन रहित |
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